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Showing posts from January, 2021
मैं तुमसे  तब भी प्रेम करती थी  जब तुम भीड़ में ग़ुम थे     मैं तुमसे  अब भी प्रेम करती हूँ  जब तुम मेरे साथ हो  मेरे पास नहीं हो     मैं तुमसे  तब भी प्रेम करती रहूंगी .....  जब तुम मेरे पास रहोगे     तुम्हारी निश्छल आँखे   प्रेम की दरियाँ ...  इनसे दूर रहके भी प्रेम की ......     बूंदो से बचा नहीं जा सकता ||  प्रिया मिश्रा :))   24..... 
बचपन में  जो लोग  नहीं खेल पाते  गुड्डे - गुड्डियों से  वो लोग ...  युवावस्था में  खेलने लगते हैं  ह्रदयक्रीड़ा  प्रिया मिश्रा :)) 24.... 
मैं पहले  पानी थी  फिर .....  धीरे - धीरे ...   बर्फ हुई ...  अब पर्वतों में  ढ़लने लगी हूँ   मैं अब  पहले जैसी नहीं रही ....  मैं अब बदलने लगी हूँ ...  प्रिया मिश्रा :))   24.... 
होता है  कभी -कभी    जिम्मेदारियों में  खोया एक नन्हा बच्चा ...    भूल जाता है   मुस्कुराना     होता है  कभी -कभी     गीली मिट्टी  पत्थर हो जाती है     प्रिया मिश्रा :))   24...  
ऐसा हमेसा ही हुआ है   की .........  मैं कुछ लिखने बैठी हूँ   और अनायाश ही पहले ......  मेरी कलम  तेरी हथेलियों पे  चलने लगी है  कुछ शब्द सिर्फ ....  तेरी हथेलियों में ही  छिपे है शायद  जिन्हे ना तुम कह पाए ...  ना मैं कभी लिख पाई ||  प्रिया मिश्रा :))   24  
कोइ दिखें अज़नबी  शहर में तुम्हारे   लग के गले उसके  सारे गम भुला देना   अपने दिल में उसे  थोड़ी सी जगह  उसे भी दे देना   वो टुटा होगा  तभी सारे बंधन  तोड़ आया होगा  अपना पुराना घर  अपना साया  छोड़ आया होगा  लूटने वाले शहर ने  उसके ईमान को भी  मजबूर किया होगा    तभी वो भागा सा   तुम्हारे शहर आया होगा ||  प्रिया मिश्रा :))
इस शहर में  बहोत शोर है  चल कही  और चलते है  मेरे मुसाफ़िर  ठिकाना अब मुश्किल है.. . यहाँ दम घुटता है ...  अब इस शहर में ||   प्रिया मिश्रा :))