ऐसा हमेसा ही हुआ है की ......... मैं कुछ लिखने बैठी हूँ और अनायाश ही पहले ...... मेरी कलम तेरी हथेलियों पे चलने लगी है कुछ शब्द सिर्फ .... तेरी हथेलियों में ही छिपे है शायद जिन्हे ना तुम कह पाए ... ना मैं कभी लिख पाई || प्रिया मिश्रा :)) 24
मैं तुमसे तब भी प्रेम करती थी जब तुम भीड़ में ग़ुम थे मैं तुमसे अब भी प्रेम करती हूँ जब तुम मेरे साथ हो मेरे पास नहीं हो मैं तुमसे तब भी प्रेम करती रहूंगी ..... जब तुम मेरे पास रहोगे तुम्हारी निश्छल आँखे प्रेम की दरियाँ ... इनसे दूर रहके भी प्रेम की ...... बूंदो से बचा नहीं जा सकता || प्रिया मिश्रा :)) 24.....
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