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Showing posts from November, 2020
मैं दूब  एक शब्द हूँ  जब मैं ज़मीं पर उगती हूँ  तो स्त्री कहलाती हूँ  जब मैं किसी पर  एक वस्त्र की तरह सजता हूँ  तो पुरुष कहलाता हूँ।।  प्रिया मिश्रा:))
कृष्णा   हे ! कृष्ण  जब जब मैं तुम्हे पुकारती हूँ  तब तब तुम मेरी पुकार सुनते हो क्या.?   तुम सुन लेते हो क्या मुझे तब ..  जब मेरी आवाज़  किसी तक नहीं पहुँच पाती तब ..  जब मैं होकर उदास रोने लगती हूँ  और तुम्हें पुकारती हूँ तब ..  तुम आ जाते हो दौड़ के  जब आ जाते हो तुम ..  कृष्णा तो दिखते क्यों नहीं तुम हमें  क्यों सुन के भी तुम हमें  अपने पास नहीं बुलाते हो।।  क्यों नहीं तुम मेरा भी मार्दर्शन करते  जैसे किया था अर्जुन का  माना अर्जुन जैसी मैं नहीं हूँ  लेकिन तुम तो कृष्णा हो  हे ! मुरलीमनोहर  तुम्हारी मुरली की जो धुन  सबको दीवाना बना देती है  तो क्या तुमको  तुम्हारे अपने भक्त भी  दीवाना बना देते है   तुम्हें भी प्रेम हो जाता है क्या.?  राधा जितना न सही  पर कर तो लेते ही होगे न  थोड़ा सा ही प्रेम हर किसी से   उसका एक क़तरा भी तुम  हमसे भी कर लो पन प्रेम।।   हे ! कृष्णा  हमसे राधा जितना ना सही  अपनी “मुरली” जितना...