लोग दो तरह के होते है
एक वो जो ....
खुद पत्थर हो जाते है
और दुसरो को भी अपने
आचरण से पत्थर बनाने
का प्रयाश करते है
दूसरे वो
जो खुद तो पत्थर हो जाते है
लेकिन उनकी ईक्षा यही होती है
जो उनसे मिले वो ...
फूल की तरह खिले
और अपनी खुसबू की
पनाहों में
महकता और
मुस्कुराता रहे ||
प्रिया मिश्रा :))
ऐसा हमेसा ही हुआ है की ......... मैं कुछ लिखने बैठी हूँ और अनायाश ही पहले ...... मेरी कलम तेरी हथेलियों पे चलने लगी है कुछ शब्द सिर्फ .... तेरी हथेलियों में ही छिपे है शायद जिन्हे ना तुम कह पाए ... ना मैं कभी लिख पाई || प्रिया मिश्रा :)) 24
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