बड़ी भारी बोझ है कान्हा
तड़प रही तेरी प्रीत है
कैसे करू समंदर पार
बीच जगत की रीत है ||
मन को अब
एक आस दिलाओ
सुनो कान्हा
अब आ भी जाओ ||
प्रिया मिश्रा :)
ऐसा हमेसा ही हुआ है की ......... मैं कुछ लिखने बैठी हूँ और अनायाश ही पहले ...... मेरी कलम तेरी हथेलियों पे चलने लगी है कुछ शब्द सिर्फ .... तेरी हथेलियों में ही छिपे है शायद जिन्हे ना तुम कह पाए ... ना मैं कभी लिख पाई || प्रिया मिश्रा :)) 24
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