बड़ी भारी बोझ है कान्हा
तड़प रही  तेरी प्रीत है
कैसे करू समंदर पार
बीच जगत की रीत है ||

मन को अब
एक आस दिलाओ
सुनो कान्हा
अब आ भी जाओ ||

प्रिया मिश्रा :) 

Comments

Popular posts from this blog